गुरू को समर्पित कुछ शब्द...


गुरू को समर्पित कुछ शब्द...

पा लिया इस धरा और आसमा को

खरीद लिया इस प्रगतिवादी जहा को
पर आज भी आपके कर्ज में डूबे हैं
भले हो कामयाबी कभी कदमों मेंपर
शीश आपके चरणों में झुके हैं ।

लड़ जाते हैं सब दूनिया से
खुद से लड़ना आपसे सीखा है,
ज्ञाता है आपके कारण
अमूर्तअप्रत्यक्ष जो लिखा है ।
वायु की गतिबालू के कण
सागर की गहराईशेर की सफाई
परमात्मा की सीढ़ीमोक्ष का द्वार
जन्म का राजमृत्यु का प्रहार
सीखा आपसे कैसे उतरना भव से पार
ऐश्वर्यबल थम गया पर हम न रूके हैं
भले हो कामयाबी कभी कदमों मेंपर
 शीश आपके चरणों में झुके हैं ।

संस्कारपरम्परावेदपुरान
इतिहासभूगोलवास्तुज्ञान
वर्णअक्षरशब्द से वेदान्तआपके बिन
मिट्टी के बने ढेर हैंसूर्य की किरणें भी अंधेर हैं
आपके कारण हम न फौंके-फूँके हैं
भले हो कामयाबी कभी कदमों मेंपर
शीश आपके चरणों में झुके हैं ।

संवेदना का मर्ममनुष्य का धर्म
कर्त्तव्य का अर्थनागरिकत्व का व्रत
कुछ करना हैकुछ कर जाने का जुनून
अंह का स्पर्शहृदय का सुकून
कंकर को कंगूरा बना सजाने वाले
कुछ भी नहीं’ को कुछ तो है’ बनाने वाले
उदय होऊ उम्मीद बन सूर्य सा छूपे हैं
भले हो कामयाबी कभी कदमों मेंपर
 शीश आपके चरणों में झुके हैं ।

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काश - part - 2

क्या तुम सक्षम हो ? / देना चाहती हूँ अपनी पहचान / अपने माता-पिता के दिये संस्कार / अपने आंगन से प्राप्त व्यवहार / अपने भाई से मिला आत्मबल का ज्ञान / अपने गुरू से मिला सदाचार - सम्मानपर. / क्या तुम सक्षम हो ? / देना चाहती हूँ चाँद की चादँनी / फूलों की खुश्बू, कुसुम का परागआत्मा का छुहन, / अमर अभिलाषा की राग / अपने पहचान का आधार / अधरों की प्यास, नवीनता की आश / पर क्या तुम सक्षम ? / देनी चाहती हूँ सांत्वना का सागर / स्थिरता का आश, ज्ञान का प्रकाश / लहरों में चमकते किरणों की चमक / सूर्य की तेज, जुगनू की जगमगाहट / पर क्या तुम सक्षम हो ? / देना चाहती हूँ भौतिकता का आभास / श्रद्धा, भक्ति, अपनत्व का भाव / हिमालय की उचाई, सागर सी गहराई / धरती सा धैर्य, शेर सा दहार / पर क्या तुम सक्षम हो ? / देना चाहती हूँ कोमलता की थपथपाहट / शीतलता का अहसास / कोयल का सूर, मोर की चाल / आत्म की शक्ति, न्याय की पुकार / पर क्या तुम सक्षम हो ?/

काश....part 1