Posts

गुरू को समर्पित कुछ शब्द...

गुरू को समर्पित कुछ शब्द... पा लिया इस धरा और आसमा को खरीद लिया इस प्रगतिवादी जहा को पर आज भी आपके कर्ज में डूबे हैं भले हो कामयाबी कभी कदमों में ,  पर शीश आपके चरणों में झुके हैं । लड़ जाते हैं सब दूनिया से खुद से लड़ना आपसे सीखा है , ज्ञाता है आपके कारण अमूर्त ,  अप्रत्यक्ष जो लिखा है । वायु की गति ,  बालू के कण सागर की गहराई ,  शेर की सफाई परमात्मा की सीढ़ी ,  मोक्ष का द्वार जन्म का राज ,  मृत्यु का प्रहार सीखा आपसे कैसे उतरना भव से पार ऐश्वर्य ,  बल थम गया पर हम न रूके हैं भले हो कामयाबी कभी कदमों में ,  पर  शीश आपके चरणों में झुके हैं । संस्कार ,  परम्परा ,  वेद ,  पुरान इतिहास ,  भूगोल ,  वास्तुज्ञान वर्ण ,  अक्षर ,  शब्द से वेदान्त ,  आपके बिन मिट्टी के बने ढेर हैं ,  सूर्य की किरणें भी अंधेर हैं आपके कारण हम न फौंके-फूँके हैं भले हो कामयाबी कभी कदमों में ,  पर शीश आपके चरणों में झुके हैं । संवेदना का मर्म ,  मनुष्य का ध...

काश - part - 2

Part   -- 2 काश..... “ तुम मजाक कर कर रहे हो , है न ? मुझे पता है तुम मजाक कर रहे हो लेकिन ऐसा मजाक मुझे बिल्कुल पसंद नहीं , देवेश । ”   “ काश यह मजाक होता दिया । ”   “.........” “ हेल्लो , दिय , दिया ..... ”   “ तुम्हें पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो ? कल तक तो सब ठीक था आज अचानक से क्या हो गया ? क्या बात है मुझे खुल के बताव , बिना कुछ सोचे समझे एक ही पल में सब कुछ खत्म कर देने को कहना तुम्हारे ही कितना आसान है न ! मुझे तो विश्वस ही नहीं हो रहा कि तुम ऐसा कह रहे हो । ” दिया को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था , रोये या गुस्सा करे । बस जो मुह से निकलता गया वह बोलती चली गई । एक ही पल में उसके कल्पनाओं का पक्षी इस तरह घरती पर गिरा कि ....                       अब तक सब कुछ ठीक था तो अचानक से क्या हुआ यही सवाल वह बार - बार करती रही । रूधे गले से देवेश को समझाने लगी कि जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना सही नहीं । “ तुम कुछ भी करो पर मुझे खुद से...