काश - part - 2
Part -- 2 काश..... “ तुम मजाक कर कर रहे हो , है न ? मुझे पता है तुम मजाक कर रहे हो लेकिन ऐसा मजाक मुझे बिल्कुल पसंद नहीं , देवेश । ” “ काश यह मजाक होता दिया । ” “.........” “ हेल्लो , दिय , दिया ..... ” “ तुम्हें पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो ? कल तक तो सब ठीक था आज अचानक से क्या हो गया ? क्या बात है मुझे खुल के बताव , बिना कुछ सोचे समझे एक ही पल में सब कुछ खत्म कर देने को कहना तुम्हारे ही कितना आसान है न ! मुझे तो विश्वस ही नहीं हो रहा कि तुम ऐसा कह रहे हो । ” दिया को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था , रोये या गुस्सा करे । बस जो मुह से निकलता गया वह बोलती चली गई । एक ही पल में उसके कल्पनाओं का पक्षी इस तरह घरती पर गिरा कि .... अब तक सब कुछ ठीक था तो अचानक से क्या हुआ यही सवाल वह बार - बार करती रही । रूधे गले से देवेश को समझाने लगी कि जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना सही नहीं । “ तुम कुछ भी करो पर मुझे खुद से...
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