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काश....part 1

Part - 1 काश.....   (यह एक सच्चे घटना पर आधारित कहानी है तथा निम्नलिखित पात्रों के नाम और स्थान काल्पनिक है ।) “ हेल्लो, सुजाता कैसी है तू ?” “ मैं ठीक हूं, अपना बता, आज कॉलेज नहीं गई ?” “ नहीं यार, तुझे पता है आज भइया देवेश के घर गये हैं रिश्ते की बात करने । ” “ क्या बात है, आज तो मैडम के पैर धरती पर नहीं है शायद... ” ( आज इन्द्रधनुष के सातों रंग दिया के मन के आँगन में उतर गये हैं, बिन बादल बरसात उसके हृदय भूमि में बरस रही है, उसका मन मोर बन झूम-झूम कर नाँचना रहा है । बेपरवा उसके बालों का उड़ना, उसके कदमों का थिरकना, उसके सांसो की रफ्तार उसके हृदय का हाल बयां कर रही है । अपने मन की उथल-पुथल को काबू में रख कर वह अपने प्रिय सखी सुजाता को कॉल करती है । ) “ सच में यार, वर्षों से सजाए सपने को आज एक मूर्त रूप मिलने जा रहा है । ” “ हाँ दिया, मैं तेरे लिए बहुत खुश हूं, बस बिहार जाके असम वालों को भूल मत जाना ” “ अरे नहीं यार, तू भी न.... ” “ अच्छा तेरे कॉलेज का क्या होगा   ?” “ मैंने प्रिंसिपल सर को कह दिया है कि अगले सेसन के लिए नये अध्यापक को चुन ले...